मीडिया Now - ऐसी परिस्थिति में भी मोदी की PR टीम मोदी को महान बताने में जुटी हुई है

ऐसी परिस्थिति में भी मोदी की PR टीम मोदी को महान बताने में जुटी हुई है

medianow 30-04-2021 18:36:47


गिरीश मालवीय / ऐसी परिस्थिति में भी मोदी की PR टीम मोदी को महान बताने में जुटी हुई है........ भारत के विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने विदेशी मदद स्वीकार करने में भी मोदी की वाहवाही कर दी कि उन्होंने कहा कि (मोदीराज में ) भारत ने 80 से ज़्यादा देशों में कोरोना वैक्सीन की 6.5 करोड़ डोज पहुँचाई है. श्रृंगला ने कहा कि जिन देशों को लग रहा है कि भारत उनके लिए मुश्किल वक़्त में खड़ा रहा है, वे खुलकर मदद कर रहे हैं हमने भी लोगों की मदद की है और हमें अब मदद मिल रही है. 

मोदी जो कुछ दिन पहले तक भारत को दुनिया काो फार्मेसी बता रहे थे और अब हालत यह है कि भारत दवाइयों के लिए दूसरे देशों का मुँह ताक रहा है

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है वो एंटी-वायरल दवाई की 10,000 शीशियाँ, 30,000 पीपीई किट्स और ज़िंक, कैल्सियम, विटमीन सी के साथ अन्य ज़रूरी दवाइयां भारत भेजेगा. यूएई  से आज यानी 30 अप्रैल को ऑक्सीजन की आपूर्ति आ सकती है. इसमें 140 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन होगी. बहरीन से भी ऑक्सीजन आने वाली है. कुवैत 1000 ऑक्सीजन सिलिंडर और 185 मिट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन भेजने वाला है. रेमेडिसिवर के मामले में भी भारत को मिस्र, बांग्लादेश, उज़्बेकिस्तान और यूएई से मदद मिल रही है.

'भारत और पाकिस्तान ने एक दूसर के एयरस्पेस के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा रखी है. पर तब भी गुरुवार पाकिस्तान में यूरोपियन यूनियन की राजदूत एंद्रोउला कामिनारा ने ट्वीट कर कहा, ''हमें पाकिस्तान को तहे दिल से शुक्रिया कहना चाहिए कि उसने ईयू से भारत भेजी जा रही मानवीय मदद के लिए उसने एयरस्पेस के इस्तेमाल की तत्काल अनुमति दी.'

यानि देश की इतनी बुरी हालत हो गयी तब भी इन्हे मोदी की ब्रांडिंग की पड़ी हुई है 

सोनिया गांधी ने सही कहा कि  ''यह वक़्त ऐसा है कि बिना वाहावाही की चिंता किए हर कोई साथ मिलकर काम करे. अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से जिस तरह से मदद मिल रही है, उसे लेकर मैं उनका शुक्रगुज़ार हूँ. लेकिन यह तब और दयनीय लगता है जब इन अंतरराष्ट्रीय मदद को प्रधानमंत्री की जय-जयकार में इस्तेमाल किया जाता है जबकि सच यह है कि अंतरराष्ट्रीय मदद सरकार की अक्षमता, असंवेदनशीलता और प्राथमिकता की समझ नहीं होने का परिचायक है. क्या यह वक़्त सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को युद्धस्तर पर आगे बढ़ाने का है?''
- लेखक एक नामी समीक्षक हैं

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